मंगलवार 8 सितंबर 2026 - 11:49
नमाज़ की संस्कृति की तब्लीग़ के लिए आधुनिक प्रचार-प्रसार के तरीकों को अपनाना ज़रूरी

हौज़ा / हुज्जतुल इस्लाम हुसैनी ने नमाज़ की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक प्रचार-प्रसार के तरीकों को अपनाने की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए कहा कि युवाओं को आकर्षित करने और धार्मिक अवधारणाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , हमदान की छात्राओं और तरह-ए-अमीन की महिला प्रचारकों के लिए 70 घंटे का स्थानीय नमाज़ प्रशिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य प्रशिक्षकों की विशेषज्ञ क्षमताओं को मजबूत करना और हमदान प्रांत में नमाज़ अदा करने की संस्कृति को विकसित करना था।

हमदान प्रांत के नमाज़ स्थापना मुख्यालय के प्रमुख हुज्जतुल-इस्लाम हुसैनी-हलम ने इस प्रशिक्षण के दौरान देश की वर्तमान संवेदनशील परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि मौजूदा विशेष और युद्ध जैसी परिस्थितियों को देखते हुए नमाज़ की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय नमाज़ प्रशिक्षकों को मजबूत करने की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है।

उन्होंने कहा कि नमाज़ व्यक्ति के मनोबल को मजबूत करने और सामाजिक एकजुटता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मौजूदा परिस्थितियों में समाज के विभिन्न वर्गों के बीच नमाज़ की संस्कृति के विस्तार और धार्मिक विश्वासों को मजबूत करने के लिए सक्षम प्रचारकों और प्रशिक्षकों की क्षमताओं का उपयोग किया जाना चाहिए।

हमदान प्रांत के नमाज़ स्थापना मुख्यालय के प्रमुख ने दर्शक/श्रोता की पहचान और समझ विकसित करने को इस प्रशिक्षण के प्रमुख उद्देश्यों में से एक बताते हुए कहा कि प्रशिक्षकों की विशेषताओं, परिस्थितियों और आवश्यकताओं को समझकर नमाज़ की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए उचित और प्रभावी तरीका चुनने में सक्षम होना चाहिए।

हुज्जतुल-इस्लाम हुसैनी-हलम ने जरूरतों की पहचान को प्रशिक्षण के एक अन्य महत्वपूर्ण विषय के रूप में बताया और कहा की मुखातबो की जरूरतों और अपेक्षाओं को सही ढंग से समझने से सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रभावशीलता बढ़ती है तथा प्रशिक्षकों को नमाज़ के प्रचार-प्रसार के लिए सही और उद्देश्यपूर्ण दिशा में आगे बढ़ने में मदद मिलती है।

उन्होंने आधुनिक प्रचार के तरीकों और बुखातबो को आकर्षित करने की तकनीकों की शिक्षा को स्थानीय नमाज़ प्रशिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का तीसरा प्रमुख विषय बताया और इसमें छात्राओं तथा तरह-ए-अमीन की महिला प्रचारकों की सक्रिय भागीदारी और उपस्थिति की सराहना की।

नमाज़ की संस्कृति की तब्लीग़ के लिए आधुनिक प्रचार-प्रसार के तरीकों को अपनाना ज़रूरी

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